बच्चों के नखरों का कैसे सामना करें

नखरे सभी उम्र के बच्चों में देखे जा सकते हैं, कभी-कभी वयस्कों में भी। हालांकि, यह आमतौर पर प्री-स्कूलर्स में देखा जाता है, जिसका अर्थ है 3 साल तक के बच्चे। शब्दकोश के अनुसार, नखरे मूल रूप से गुस्से और हताशा का एक अनियंत्रित आवेग है, प्रायः एक छोटे बच्चे में।

मैंने कहीं पढ़ा था, नखरे कई आकार और आकृति के होते हैं। मूल रूप से हमें यह तब  देखने को मिलता है जब कोई बच्चा किसी भी स्थिति को संभाल नहीं सकता है। प्रायः हम उन्हें रोते, चिल्लाते, चीजों को फेंकते, मारते, फर्श पर खुद को गिराते, भागते और कभीकभी चीजों को तोड़ते हुए भी देखते हैं।

प्रायः नखरे प्रीस्कूल की उम्र के बच्चों में देखे जाते हैं, क्योंकि उस समय वे अपने सामाजिक और भावनात्मक कौशल को विकसित करना शुरू कर देते हैं । इस छोटी सी उम्र में, बच्चे अपनी भावनाओं को शब्दों में बयां करने में असमर्थ होते हैं और इसलिए ये सभी प्रतिक्रियाएं होती हैं। यह वह उम्र भी है जब बच्चे अधिक स्वतंत्र होना चाहते हैं। उनका खुद का मन होने लगता है, लेकिन साथ ही उन्हें आपसे दूर होने और अलग होने का डर भी होता है और परिणामस्वरूप उन्हें व्यग्रता होने लगती है यदि सही उम्र में संभाला नहीं गया, तो बड़े बच्चों में भी नखरे जारी रह सकते हैं, जिन्हें संभालना और भी मुश्किल हो जाता है।

एक माँ के रूप में, मैंने देखा है कि इसके पीछे कुछ सामान्य कारण होते हैं । सबसे आम है, थकान, अपर्याप्त नींद, भूख, अति-उत्तेजना; डर, शर्म जैसी भावनाएँ। और कभी-कभी बच्चे का प्राकृतिक स्वभाव ।

जैसा कि मैंने पहले कहा था, यहां तक ​​कि हम वयस्क भी एक विशेष स्थिति से निपटने में सक्षम नहीं होने पर आवेश में आ सकते हैं। लेकिन, समय के साथ, हम सीखते हैं कि कैसे प्रतिक्रिया करनी है और उन स्थितियों से निपटना है। मेरा विश्वास कीजिये क्रोधावेश को संभालना आसान नहीं होता है। वास्तव में, यह बहुत मुश्किल है। क्रोधावेश के साथ एक उचित तरीके से निपटना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि हमारे बच्चे सीखें। आइए कुछ बिंदुओं पर एक नज़र डालें।

नखरों को कैसे पहचानें:

  • सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण ​​है कि हम कारणों की पहचान करें। खासकर जब उनका सम्बन्ध भूख, थकान और अति उत्तेजना से हो । उनकी दिनचर्या सुनिश्चित करना आवश्यक ​​है । पूर्वनिर्धारित कार्यसूची पर बच्चे बेहतर कार्य करते हैं।
  •  अपने बच्चे की भावनाओं के साथ तालमेल बिठाएं। कोशिश करें और समझें या बेहतर ढंग से अपने बच्चे को शब्दों में अपनी भावनाओं को रखने में मदद करें। उदाहरण के लिए, ये कहने के बजाय कि मैंने आपको ऐसा नहीं करने के लिए कहा था / या मैंने आपको ऐसा कहा था, उससे पूछिए, क्या आप परेशान हैं क्योंकि आपका स्नैक नीचे गिर गया था?

आपका बच्चा उस समय क्या और कैसा महसूस कर रहा है, ऐसा समझने में उसकी मदद करें

  • अपने बच्चे के साथ मनोभावों पर बात करें। उसे ऐसा बताने के लिए प्रोत्साहित करें कि  वह उस समय क्यों झुंझलाया या आवेश में आया । उदाहरण के लिए, मेरा 27 महीने का बच्चा रोता है और गुस्से को दिखाता है जब वह किसी विशेष कार्य को पूरा करने में सक्षम नहीं होता है। उदाहरणतः जब  वह अपनी पहेली को सुलझाने में सक्षम नहीं है। इसलिए, मैं पूछती हूं, क्या तुम परेशान हैं हो क्योंकि तुम पहेली नहीं सुलझा सकते ?

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माता पिता इन आवेश के क्षणों से कैसे निबटें?

  • सबसे अच्छी बात जो आप माता-पिता के रूप में कर सकते हैं वह है अपने चित्त को शांत रखें  । आपका बच्चा पहले से ही अपनी भावनाओं को सुलझाने के प्रयास में तनाव में है, इसलिए आपका गुस्सा कोई भी अच्छा करने वाला नहीं है। एक गहरी सांस लें, और थोड़ा इंतज़ार करें । कोशिश करें और पता करें कि क्या गलत है और फिर धीरेधीरे और आराम से निपटें। मुझे पता है कि करने की अपेक्षा कहना आसान है, लेकिन ऐसा करना ही उस समय सर्वोत्तम है । और तो और बहुत बार, आपको शांत होने का नाटक भी करना होगा !!!!
  • उस विशेष समय में अपने बच्चे की भावना को स्वीकार करें । उसके मनोभाव से अवगत रहें। स्वीकार करें कि आप उसकी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सकते। उसे बताएं कि आप समझते हैं कि उसे कैसा महसूस  हो रहा है । “तुम्हारा व्यवहार ग़लत है”, ऐसा कहने की बज़ाय आप कह सकती हैं, ” मुझे भी निराश होती है जब अपनी पहेली सुलझा नहीं पाती !” ।
  • आवेश के क्षणों को गुज़र जाने दें  । और मैं इसका पालन करती हूं। अपने बच्चे को अपनी उपस्थिति महसूस करने दें। उससे तर्क करने या उसे विचलित करने की कोशिश न करें, क्योंकि बच्चा भावनाओं के इस स्फोट में आपकी सुनने वाला नहीं है। इसलिए, आवेश को जाने दें और फिर अपने बच्चे से बात करें।
  • अपने दृष्टिकोण में  एक-सामान रहें  – परिवर्तन में समय लगता है। इससे पहले कि आपका बच्चा इस सब से निपटना सीख ले, उसको काफी प्रयत्न करने होंगे । यदि कभी-कभी आप उसके आवेशित होने पर उसकी मांगें पूरी कर देते हैं और बाकी समय उसकी नहीं सुनते तो इससे स्थिति और खराब हो सकती है। अपने बच्चे को और अधिक भ्रमित न करें। समाधान करते समय अपने निर्णय का भी उपयोग करें। उदाहरण के लिए, मेरा बेटा हर एक दिन रोता है जब उसे अपने बाथ टब से बाहर आने के लिए कहा जाता है। मैं क्या करूं? मैं बस शावर / नल बंद कर देता हूं और उसे बताती हूं कि पानी खत्म हो गया है। इस तरह कभी-कभी, मैं उसके आवेश से बचती हूं और अन्य समय पर मैं इंतजार करती हूं कि वह खुद समझे की पानी खत्म का मतलब है अभी स्नान नहीं होगा
  • और हां, कभी भी उसके मचलने या आवेशित होने की वज़ह से उसे पुरस्कृत नहीं करें । एक बार मेरी बेटी एक खिलौने के लिए रो रही थी जो उसके पास पहले से है, लेकिन उसे वही खिलौना एक दूसरे रंग में चाहिए था । अगर मैं उसकी इच्छापूर्ति करती हूँ तो उसे महसूस होगा कि रोने से वह जो चाहे उसे पा सकती है। आप ऐसा न करें । अपने उत्तर के साथ दृढ़ रहें। नहीं का मतलब नहीं होता है एक हाँ के बाद तुरंत नहीं कहें
स्वयं के लिए टिपण्णी: कभी मत सोचो कि आपका बच्चा यह सब जानबूझ कर कर रहा है। इससे निपटने के लिए वो अभी अभ्यस्त नहीं है  और उनके नखरे पर कभी नहीं हंसे। मुझे पता है कि यह कई बार मज़ेदार हो सकता है, लेकिन यह आपके बच्चे को और भी परेशान कर सकता है। और हम पहले से ही जटिल स्थिति को जटिल नहीं बनाना चाहते हैं।
एक गैर-अभिभावक के रूप में, मैं अक्सर इन स्थितियों में माता-पिता का आंकलन करता था। लेकिन अब जब मैं खुद एक अभिभावक हूँ, मैंने ऐसा करना बंद कर दिया है। शायद ये महत्वपूर्ण नहीं है कि आपका बच्चा कितने नखरे करता है, बल्कि ये समझना आवश्यक है कि नखरों या आवेश का हम कैसे सामना करें.

About The Author

Gayatri is from Pune. A fauji brat and now a fauji wife. Professionally a Community Rehabilitation Physiotherapist, but now a happy SAHM to Saanvi (7 years old) and Anay (27 months old). Being a SAHM gave her the opportunity to connect with a passion for blogging and motherlymess.com. My blog is my space, where I share my thoughts on parenting, lifestyle, product reviews and much more.

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