कामकाजी ग्रहणी से प्राप्त पत्र – एक स्टे अट होम मॉम की सच्चाई

 यह अजीब लगता है पर माताओं का वर्गीकरण इन दिनों उनके कार्यक्षेत्र के अनुसार होता है.  वर्किंग मॉम,  फुल टाइम वाकिंग मॉम,  पार्ट टाइम वाकिंग मॉम,  फुल टाइम वर्क फ्रॉम होम मॉम  और स्टे अट होम मॉम.  गंभीरता से सोचिए:  मैं पूछती हूं क्या घर पर रहने वाली मां काम नहीं करती?  क्या आप ऊपर वर्णित श्रेणी की  माओ की तुलना भी कर सकते हैं?  एक फुल टाइम वाकिंग मॉम और पार्ट टाइम  वर्किंग मॉम मैं आखिर क्या फर्क है? 

 तो सुनिए:

 एक मां हमेशा कार्यरत रहती है 24 घंटे,  साल भर,  बिना छुट्टी या साप्ताहिक अवकाश के.  ऊपर बताए गए वर्गीकरण के अनुसार मैं खुद एक  पार्ट टाइम वाकिंग मॉम रही हूं और  अब फुल टाइम ग्रहणी हूं.  मेरे हिसाब से दोनों में बहुत अंतर है और यह अंतर कार्यालय के कार्यभार,  लक्ष्य,  और समय  सीमाओं या घर के काम के दबाव की वजह से नहीं है. 


Activities to Boost Your Child’s Developmental Skills

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 बल्कि मैं उन चुनौतियों का उल्लेख कर रही हूं जो सामाजिक दृष्टिकोण से आता है.  है ना यह अजीब बात!!!

 एक मां अपने और अपने परिवार के लिए उत्तम हितों को दिया में रखकर काम करती है.  फिर भी दूसरे लोग और कभी कभी हमारे प्रिय जन भी हमारे हर कदम और हर फैसले का मूल्यांकन करते रहते हैं. नीचे मैंने उन चुनौतियों का उल्लेख किया है जिनका एक स्टे अट होम मॉम सामना करती है.

 समझौता:  अक्सर लोग कहते हैं “ हम समझ सकते हैं कि आपके बच्चे छोटे हैं और आपके पास दादा दादी नाना नानी या अन्य कोई मददगार नहीं है”.  यह कोई बड़ी बात नहीं है.  ऐसा नहीं है कि आपकी कार्यक्षमता समाप्त हो गई.  आप कुछ वर्षों के बाद पुनः अपना कार्य प्रारंभ कर सकती हैं.  परंतु वास्तविकता क्या है?  मेरे हिसाब से यह एक समझौता या बलिदान नहीं है बल्कि यह एक चुनाव है जो  एक मां अपने बच्चों के हित में करती है. ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार  का चुनाव एक  फुल टाइम वर्किंग मॉम  करती है.

 आर्थिक स्वतंत्रता:  मेरे लिए यह अब तक की सबसे बड़ी चुनौती रही है.  ऐसा नहीं है की मेरे पति मेरी  जरूरतें पूरी नहीं करते.  लेकिन यह भी एक तथ्य है कि वह  चीजें उन्हें मेरे लिए लानी पड़ती हैं और मुझे कहीं भी लेन-देन करने से पहले उन्हें बताना पड़ता है.  अर्थात मैं स्वतंत्र रूप से पैसे खर्च नहीं कर सकती और कई बार मुझे उनसे पैसे मांगने भी पढ़ते हैं.  यही कारण है कि मैं अपने कामकाजी दिनों को याद करती हूं.   इस आधुनिक समय में जहां की पति हम माताओं की पसंद और निर्णय की सराहना करते हैं फिर भी हमें पैसों के मामले में झिझक महसूस होती है.

 दुर्मिल होती अपनी पहचान:  घर पर रहकर काम करने का मतलब है केवल अपने बच्चों और घर के कामों के बारे में सोचना.  कपड़े धोने की टोकरी और डिश वॉशर भरने से लेकर फर्श पर बिखरे हुए खिलौने समेटने तक. इतना ही नहीं आपको उस बच्चे को भी संभालना है जो प्रतिदिन आपको अपना  साहसिक और खुराफाती रूप दिखाता है.  यही कारण है कि जब आप वास्तव में एक नौकरी और उसके अंतर्गत की समय सीमाएं और फिर खुद को याद करना शुरू करते हैं.  आप चाहते हैं कि लोग आपको जाने ना की  सिर्फ किसी के मां के रूप में. 

 आपके मित्र आपको उबाऊ समझने लगते हैं:  अचानक आपके मित्र आप की उपेक्षा करने लगते हैं और आपको पार्टियों में आमंत्रित नहीं किया जाता है.  वह लोग आपको बोर समझने लगते हैं.  घर पर छोटे बच्चों का होना काफी मनोरंजक होता है उन्हें चीजें सिखाना भी रोमांचक होता है लेकिन यह सब आपको पूरे दिन करना पड़ता है.  जिसके कारण आप की शब्दावली और रुचि वहीं तक सीमित हो जाती है.  इसी कारण आपके गैर विवाहित और गैर अभिभावक मित्र आपसे चर्चा नहीं करना चाहते.  तो आप मूल रूप से किसी साथी के लिए तरसते हैं.  जिसके साथ आप एक वयस्क की तरह बातचीत कर सके.  ऐसा ना होने पर आप भावनात्मक रूप से अलग-थलग महसूस कर सकते हैं.

 आंकलन:  लोग आपको हमेशा आते रहते हैं जैसे कि घर साफ क्यों नहीं है,  आपके बच्चे पौष्टिक खाना क्यों नहीं खा रहे हैं या फिर आपने स्नान क्यों नहीं किया है इत्यादि.  चाहे आप कुछ भी कर ले आपको आका ही जाएगा और इन्हीं सब बातों से आपको  गुस्सा भी आएगा.  हमारे पितृसत्तात्मक समाज  ने यह मान लिया है कि यह सब काम महिलाओं के हैं.  आखिर मैं घर में रहने वाली अकेली सदस्य नहीं हूं और  इन बच्चों को इस दुनिया में लाने में मेरे पति का बराबर का योगदान है.  तो फिर क्यों उन्हें “ घर पर रहने वाला पिता”  या “ फुल टाइम वर्किंग पिता”  होने के लिए आका नहीं  जाता?

 और इन सब के ऊपर आपको लगता है कि आपका जीवन  बोरिंग है.  क्योंकि किसी भी समय आप एक देखभाल करता,  डॉक्टर,  शिक्षक,  रसोईया,  ड्राइवर,  परामर्शदाता और ग्रहणी है परंतु फिर भी आपके काम की सराहना नहीं होती.  कोई उस पर ध्यान नहीं देता,  और आपकी ड्यूटी कभी खत्म नहीं होती.  मां बनना अपने आप में एक मुश्किल और थका देने वाला काम है. 

 घर पर रहकर काम करने वाली मां होने के नाते उपरोक्त पहलुओं में यह सब शामिल है.  लेकिन ऐसे तरीके भी है जो इन सबको आसान बना सकते हैं.

  1.  अपने आप को याद दिलाएं कि यह विराम अच्छे के लिए है और हमेशा के लिए नहीं है.  जैसे ही उचित समय लगे आप काम पर वापस चले जाएंगे.
  2. अपनी मित्र मंडली का विस्तार करें अन्य माओं के साथ बातचीत करना और समय व्यतीत करना जरूरी है इस तरह आप समान विचारों वाले व्यक्तियों के साथ जुड़ पाएंगे.  और इन्हीं दोस्तों से आपको काफी मदद भी मिलती है.
  3.  कुछ बातें अनसुनी भी करनी चाहिए केवल उसी की सुनो जो तुम्हारी परवाह करते हैं और जो तुम्हारे शुभचिंतक हो.  अवांछित लोगों और उनकी अवांछित सलाह को फिल्टर करें. 
  4.  अपने खुद के लिए कुछ समय निकालना बहुत जरूरी है आपको जो पसंद हो वह करें. अपने आप को प्राथमिकता देना उतना ही जरूरी है जितना कि अपने घर वालों को बल्कि मैं कहूंगी ज्यादा जरूरी है.
  5.  अपने जीवनसाथी से बात करें.  उसे अपने दिल की बात बताएं कि आप कैसा महसूस करते हैं और वह  निश्चित रूप से समझेंगे.

 स्वयं के लिए टिप्पणी खाली प्याले से आप कुछ नहीं निकाल सकते.  पहले स्वयं से प्यार करें,  अपने आप को प्राथमिकता दें.  जब आप स्वयं को आदर और सम्मान देंगे तो ही आपको सम्मान मिलेगा.  वही करें जिससे आपको प्रसन्नता मिलती है. “  हमेशा याद रखें कि आप एक महान कार्य कर रही हैं और अपने आप पर गर्व महसूस करें”.


About The Author

Gayatri is from Pune. A fauji brat and now a fauji wife. Professionally a Community Rehabilitation Physiotherapist, but now a happy SAHM to Saanvi (7 years old) and Anay (27 months old). Being a SAHM gave her the opportunity to connect with a passion for blogging and motherlymess.com. My blog is my space, where I share my thoughts on parenting, lifestyle, product reviews and much more.

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